10 February 2012

मवाली 4


लडक़े ने उन्हें गिना और कहा, “हाँ, चम्मच पाँच ही हैं।
पाँच कैसे हैं?” स्त्री कुछ सख़्त स्वर में बोली, “पूरी छ: हैं। एक चम्मच कहाँ छोड़ आया है?”
छोड़ कहाँ आया होगा, जेब में रख ली होगी। इसकी जेब में देखो,” पुरुष ने पास आते हुए कहा।
लडक़े का हाथ सहसा अपनी जेब पर चला गया, और सीपियों के फैलाव को छूकर, उनके बचाव के लिए वहीं रुका रहा।
निकाल चम्मच, जेब पर हाथ क्यों रखे हुए है?” पुरुष ने उसे डाँटा। लडक़ा सहमा-सा टोकरी के पास से उठकर दो क़दम पीछे हट गया।
मैंने चम्मच नहीं ली,” उसने कमज़ोर आवाज़ में कहा, “मुझे नहीं पता वह चम्मच कहाँ है।
तुझे नहीं तो तेरे बाप को पता है?” कहते हुए उस व्यक्ति ने लडक़े को बालों से पकड़ लिया और उसके मुँह पर एक तमाचा जड़ दिया।
दे दे चम्मच, तुझसे कुछ भी नहीं कहेंगे,” स्त्री ने जैसे उस पर तरस खाकर कहा।
मेरे पास चम्मच नहीं है,” लडक़ा उसी स्वर में बोला, “मेरी जेब में मेरी अपनी चीज़ें हैं।
तेरी अपनी चीज़ें हैं!पुरुष बड़बड़ाया। अभी देखता हूँ तेरी कौन-सी अपनी चीज़ें हैं! और उसके लडक़े के बालों को अच्छी तरह झिंझोडक़र उसका जेब पर रखा हाथ अपने मोटे हाथ में कस लिया। उस हाथ के दबाव से लडक़े ने महसूस किया कि उसकी जेब में सीपियाँ टूट रही हैं। उसे जैसे उन सब सीपियों के चेहरे याद थे, और उसका हाथ पहचान रहा था कि उनमें कौन-कौन-सी सीपी टूट रही है। उसने झटके से पुरुष के हाथ से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की। मगर हाथ तो क्या छूट पाता, पुरुष ने गर्दन को और दबोच लिया।
साले, भागना चाहता है?” पुरुष होंठ चबाता हुआ बोला, “देखो, मैं कैसे अभी तेरी गत बनताा हूँ! हटा हाथ!
लडक़े का हाथ उस मोटे हाथ के शिकंजे में निर्जीव-सा होकर हट गया। पुरुष ने उसकी जेब को बाहर से दबाया, जिससे कितनी ही सीपियाँ टूट गयीं।
है चम्मच।उसने स्त्री की तरफ़ देखकर कहा, “हरामी ने जाने जेब में और क्या-क्या चीज़ें भर रखी हैं!
चोर कहीं का!लडक़ी, अपने छोटे भाइयों को लेकर अलग खड़ी थी, बोली।
लडक़े का संघर्ष समाप्त हो गया था। पुरुष ने उसकी जेब में हाथ डालकर जेब की सब चीज़ें बाहर निकाल लीं। अधिकांश टूटी हुई सीपियाँ ही थीं। उनके अलावा और जो माल बरामद हुआ, वह था एक ताँबे का तावीज़, एक आधा खाया हुआ अमरूद, कुछ कौडिय़ाँ और एक पैसा...।
नहीं निकली?” स्त्री ने सब चीज़ों पर नज़र डालकर पूछा।
नहीं,” पुरुष खिसियाने स्वर में बोला, “जाने सूअर का बच्चा कहाँ छिपा आया है!
उधर धोने ले गया था, वहीं कहीं रख आया होगा।लडक़ी दूर से बोली।
ज़रा-सी उम्र में साले सब कुछ सीख जाते हैं!पुरुष ने लडक़े की चीज़ें गुस्से में दूर फेंकते हुए कहा, “जा, ले जा अपनी चीज़ें माँ के पास।
अँधेरे में ताँबे की चमक कुछ दूर तक दिखाई दी, फिर पता नहीं क्या कहाँ जा गिरा। सीपियाँ हल्की थीं इसलिए वे अधिक दूर नहीं गयीं।
लडक़ा तेज़ी से उस तरफ़ भागा जिधर उसकी चीज़ें फेंकी गयी थीं। वह अँधेरे में आँखें गड़ा-गड़ाकर देखने लगा। लोगों के फेंके हुए जूठे दोने, खाली नारियल और बहुत-सी मसली हुई थैलियाँ जहाँ-तहाँ पड़ी थीं। एक चमकती चीज़ को देखकर वह उसे उठाने के लिए झुका। वह सिगरेट का बरक था। एक जगह एक पत्थर को देखकर भी उसे तावीज़ का भ्रम हुआ। उसे उठाकर उसने ज़ोर से वापस पटक दिया। फिर वह थैलियों और पत्तों को पैरों से दबा-दबाकर टटोलने लगा। दो-एक ख़ाली नारियलों को भी उसने झटककर देखा। काफ़ी देर देखने पर भी कुछ नहीं मिला, तो वह सीधा खड़ा हो गया। वह पुरुष समुद्र के पास होकर वापस आ रहा था। लडक़ा तेज़ी से उसकी तरफ़ लपका।
मेरा टिक्का दो!उसने पुरुष के पास पहुँचकर गुस्से के साथ कहा।
हट!पुरुष उसे बाँह से धकेलकर आगे बढ़ गया।
लडक़े ने पीछे से उसकी बाँह पकड़ ली। बोला, “पहले मेरा टिक्का दो। मैं तुम्हें ऐसे नहीं जाने दूँगा।

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