10 February 2012

मवाली 5

हट जा, नहीं तेरा सिर फोड़ दूँगा,” पुरुष बाँह छुड़ाने की चेष्टा करने लगा। भैन...मवालीगीरी करता है?”
बहन की गाली मत दो!लडक़े का स्वर बहुत तीखा हो गया।
कह रहा हूँ हट जा, नहीं तो...पुरुष ने उससे बाँह छुड़ाकर उसे धक्का दे दिया। लडक़े ने गिरते-गिरते किसी तरह अपने को सँभाल लिया और झपटकर उसकी बाँह में दाँत गड़ा दिये। इससे वह पुरुष एक बार तड़प गया। फिर लडक़े को ज़मीन पर गिराकर वह उसे जूते से ठोकरें लगाने लगा। उसकी स्त्री और बच्चे पास आ गये। आसपास और भी कई लोग जमा हो गये। लडक़ा चिल्ला रहा था, “मार दे। मेरी जान ले ले, लेकिन मैं अपना टिक्का लिये बिना नहीं छोड़ूँगा। तू मार, और मार...।
तीन-चार व्यक्तियों के रोकने पर वह व्यक्ति मारने से हटा। उसकी पत्नी लोगों को सुनाकर कहने लगी, “इतना-सा है, मगर है पक्का चोर। हमने इसे सामान उठाने के लिए तय किया और सामान टोकरी में रखने को कहा। पर हमारे देखते-देखते ही इसने एक चम्मच ग़ायब कर दी। पूछा, तो भाग खड़ा हुआ। अब उनकी बाँह पर दाँत काट रहा था। दुनिया में ऐसे-ऐसे नालायक भी होते हैं!
और वह व्यक्ति रोकने वालों से कह रहा था, “मैंने तो इसे कुछ ठोकरें ही लगायी हैं। ऐसे हरामी को तो गोली से उड़ा देना चाहिए। साले एक तो चोरी करते हैं, ऊपर से मवालीगीरी करके दिखाते हैं।
लडक़ा रो रहा था। दो व्यक्तियों की पकड़ में छटपटाता हुआ कह रहा था, “मेरा टिक्का मेरी माँ ने मुझे दिया था। मेरी माँ मर चुकी है। अब मुझे वह टिक्का कहाँ से मिलेगा? मैं इससे अपना टिक्का लेकर रहूँगा। या यह मेरी जान ले ले, या मैं इसकी जान ले लूँगा।और वह पकड़ से छूटने के लिए और भी संघर्ष करने लगा।
उधर वह व्यक्ति कह रहा था, “मैं कहता हूँ इसे हवालात में दे देना चाहिए। इसकी तलाशी ली, तो इसकी जेब से ताँबे का एक तावीज़-सा निकला। यह भी साले ने किसी का उठाया होगा। अब भी वह यहीं-कहीं पड़ा है, पर उसके बहाने यह ख़ून करने पर उतारू हो रहा है।
छोडि़ए भाई साहब,” कोई उसे समझाता हुआ बोला, “आप शरीफ़ आदमी हैं। आप क्यों इसे मुँह लगाते हैं? चोरी करना और जेब काटना तो इन लोगों का धन्धा ही है। आपके साथ बाल-बच्चे हैं, आप चलिए यहाँ से।
पास से गुज़रते हुए व्यक्ति ने दूसरे से पूछा, “क्या बात हुई है यहाँ?”
पता नहीं,” उसे उत्तर मिला, “एक लडक़े ने कुछ चोरी-ओरी की है। उसी के लिए उसे मार-आर पड़ रही है।
बम्बई में इन लोगों के मारे नाक में दम है।उस व्यक्ति ने कहा।
चौपाटी तो इन लोगों का ख़ास अड्ïडा है!दूसरे ने समर्थन किया।
देखो कैसे गालियाँ बक रहा है!
बकने दीजिए। आप क्यों अपना वक़्त ख़राब करते हैं?”
वह व्यक्ति दूसरों के कहने-कहाने से स्त्री और बच्चों को साथ लेकर वहाँ से चल दिया। चलते हुए वह दूसरों को समझाने लगा कि ऐसे लडक़ों के साथ स$ख्ती का बर्ताव करना क्यों ज़रूरी है। दो व्यक्ति अब भी लडक़े को पकड़े हुए थे और वह उनके हाथ से छूटने की चेष्टा करता हुआ सबको गालियाँ दे रहा था। लोग उसे खींचते हुए दूसरी तरफ़ ले गये। जब उसे छोड़ा गया, तो वह थोड़ी दूर जाकर और ज़ोर से गालियाँ देने लगा। फिर वह सिसकियाँ भरता हुआ रेत पर औंधा पड़ गया।
चौपाटी के अँधेरे भागों में अँधेरा पहले से गहरा हो गया था। मैदान में टहलने वाले लोगों की संख्या बहुत कम हो गयी थी। कहीं-कहीं कोई इक्का-दुक्का आदमी ही नज़र आता था। दूर कोने में एक आदमी एक लडक़ी की कमर में बाँह डाले बेंच पर बैठा उसे चूम रहा था। धीरे-धीरे समुद्र की लहरों और किनारे की बेंचों के बीच का फ़ासला कम हो रहा था। स्पाश्‌ शीकी आवाज़ के साथ हर लहर दूसरी लहर से आगे बढ़ आती थी। दूर क्षितिज के पास मछुआ-नावों की बत्तियाँ टिमटिमा रही थीं। टिट्‌ टिट्‌ टिट्‌...टिट्‌ टिट्‌ टिट्‌...टिट्‌ टिट्‌ टिट्‌! वातावरण में तरह-तरह की आवाज़ें फैली थीं। अरब सागर की हवा हुआँ-हुआँकरती सामने की इमारतों से टकरा रही थी।
काफ़ी देर पड़े रहने के बाद लडक़ा रेत से उठ खड़ा हुआ, और आँखों से ज़मीन को टटोलता घिसटते पैरों से चलने लगा। सहसा उसका पैर एक नारियल पर से उलटा हो गया। उसने नारियल को कसकर गाली दी और ज़ोर की एक ठोकर लगायी। नारियल लुढक़ता हुआ समुद्र की लहरों की तरफ़ चला गया। उसने पास जाकर उसे दूसरी ठोकर लगायी। नारियल सामने से आती लहर में खो गया। उस लहर के लौटते-लौटते उसे नारियल फिर दिखाई दे गया। एक और लहर उमड़ती आ रही थी। इसलिए पास न जाकर उसने वहीं से एक पत्थर नारियल को मारा, और साथ भरपूर गाली दी, “तेरी माँ को...
और फिर वह सामने से आती हर लहर को ज़ोर-ज़ोर से पत्थर मारने लगा, “तेरी माँ को...तेरी बहन को...।

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